aatmahatya ke karan

आखिर क्यों सोंचते हैं लोग आत्महत्या के बारे में : जानिये इसके कारण क्या हैं.

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जिंदगी के बारे में किसी ने सच ही कहा है –

“चंद ख्वाहिशों ने बर्बाद कर रखी है ज़िन्दगी मेरी,

सहुलतें तो मिलती हैं मगर सुकून नहीं मिलता.”

क्या आपको पता है कि हर वर्ष 10 सितम्बर को ‘World Suicide Prevention Day’ मनाया जाता है? यह क्यों मनाया जाता है? इसका उद्देश्य क्या है? इसे मनाने का उद्देश्य यही होता है ताकि लोगों को आत्महत्या जैसे अनुचित कदम उठाने से रोका जा सके  तथा आत्महत्या के कारणों को समझा जा सके.

ज्ञात हो की आज के वर्तमान समय में ‘आत्महत्या करना’ एक वैश्विक समस्या बन चुका है और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गैनाइज़ेशन के आंकड़ों की मानें तो यह लगातार बढती ही जा रही है.

दोस्तों, आज के लेख में हम इस वैश्विक समस्या के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे – क्यों कोई आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाता है?

क्यों करते हैं लोग आत्महत्या? (Aatmahatya ke karan)

चलिए अब बात करते हैं आज के मुख्य प्रश्न के बारे में कि क्यों करते हैं लोग आत्महत्या? सबसे पहले तो हमें ये समझना है कि लोग जिन्दा क्यों रहते हैं? हर कोई  जो जीवित व्यक्ति है उसका कोई न कोई मकसद जरुर होता है. वह किसी न किसी मकसद के लिए ही जीता है. वह मकसद कुछ भी हो सकता है जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न – भिन्न होता है.

सामान्यतः जो लोग खुद को ख़त्म करने के बारे में सोंचते हैं उनकी यही सोंच होती है कि उनका जिन्दा रहने का कोई मतलब नहीं है. हमें इसके पीछे के मनोविज्ञान को बारीकी से समझना है. हर कोई जिंदगी से कुछ न कुछ जरुर चाहता है लेकिन अफ़सोस जिंदगी वैसी नहीं चलती जैसा वो चाहते हैं. लोग ज़िन्दगी पर अपनी इच्छायें थोपना चाहते हैं जो संभव ही नहीं है. इच्छा एक ऐसी चीज है जो एक पूरी होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है. शायद यह कभी न पूरी होनेवाली चीज है – तो फिर उपाय क्या है?

“उपाय यही है कि तुम खुद को ख़त्म करने के बजाय अपनी इच्छाओं को ख़त्म करो.” यह बात सत्य है जो व्यक्ति अपनी ज़िन्दगी में जब बहुत ज्यादा परेशान होता है तो वह खुद को मिटाने के बारे में सोंचता है या किसी और को मारना चाहता है.

जब कोई व्यक्ति किसी चीज को पाने के लिए कड़ा संघर्ष करता है, उसके लिए काफी लम्बा इन्तिज़ार करता है और यही सोंचता रहता है की भविष्य में वह उस चीज को जरुर हासिल कर लेगा. वह उस चीज को ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लेता है. किन्तु जब वह चीज उसे नहीं मिलती है तो ऐसी स्तिथि में उसकी सारी उम्मीदें ख़त्म हो जाती है. वह सोंचता है कि ज़िन्दगी में उसके लिए अब कुछ बचा ही नहीं है और इसकी वजह से उसकी ज़िंदगी से रुचि ख़त्म होने लगती है. उसका मन रोजमर्रा के सामान्य कामकाज से उचट जाता है. धीरे – धीरे वह अवसाद का शिकार हो जाता है.

अवसाद में चले जाने के कई कारण हो सकते है – जैसे किसी करीबी का मौत, नौकरी चले जाना, अपनी मनपसंद चाहत को पूरा न कर पाना, प्रेम में असफल होना आदि. अवसाद आत्महत्या करने का कारण हो सकता है.

आत्महत्या करने की भावना कुछ लोगों में प्रबल होती है तथा कुछ लोगों में यह भावाना क्षणिक होती है जो समय के समाप्त हो जाती है. वैसे तो जीवन में परेशानी हम सबकी जिंदगी में होती है किन्तु जो लोग नकारात्मक विचारों से भरे होते हैं उन्हें जिंदगी दर्द भरी प्रतीत होती है. ऐसे लोगों का मानना होता है कि इस दर्द भरी जिंदगी से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय केवल – आत्महत्या है.

अवसाद (Depression) क्या है?

Depression यानि अवसाद को आप ‘mood disorder’ भी कह सकते हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं. किसी व्यक्ति को अवसाद है यानि वह संतुष्ट नहीं है. वह जिंदगी में कुछ बेहद गहराई से चाहता है और उसे हासिल करने में असमर्थ होने पर वह अत्यंत कुंठित होता है.

आपको एक बाद ध्यान रहे कि जीवन है तो उसके साथ संघर्ष भी है. बिना संघर्ष या परेशानी का किसी का जीवन नहीं है. कोई संघर्ष को चुनौती के रूप में स्वीकार कर उसका सामना करता है और कोई हार मान लेता है. हर किसी का सोंचने का लेवल अलग – अलग है. ज़िन्दगी में सबसे कठिन लड़ाई मनुष्य खुद से ही लड़ता है. ज़िन्दगी के इस कठिन लड़ाई को लड़ने के लिए जरुरी है चैतन्य मन मस्तिष्क.

अवसाद के भी कई रूप होते हैं. यह भी देखा गया है कि जिनलोगों की मनोस्तिथि ठीक नहीं होती है वैसे लोगों के मन में नकारात्मक विचार आते – जाते रहते हैं. ऐसे लोग कभी – कभी बिल्कुल अच्छा वर्ताव करते हैं और फिर से अवसाद में चले जाते हैं. आपने देखा या सुना होगा कि – कोई व्यक्ति सबसे साथ अच्छे से हंस – बोल रहा होता है और अचानक से आत्महत्या कर लेता है.

वास्तव में ऐसे नकारात्मक विचारों वाले व्यक्ति घोर निराशा, क्रोध, शर्मिंदगी आदि के कारण ऐसे अप्रीय कदम उठा लेते हैं. जिसके बारे में कभी कोई सोचता नहीं है.

मौजूदा समय में प्रेम – सम्बन्ध भी हमारे देश भारत में आत्महत्या का एक बड़ा कारण है.

किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखे तो हो जाएँ सावधान

यह बात सत्य है कि आप किसी व्यक्ति के मन की बात नहीं समझ सकते हैं कि उसके मन में क्या चल रहा है. जब व्यक्ति अत्यधिक तनाव या अवसाद से गुजर रहा होता है तो तो उसके मन में खुद को मिटा लेने की विचार आना एक आम समस्या है. ज्यादातर मामलों में ये समस्या अस्थायी ही होते हैं जिसका ईलाज किया जा सकता है किन्तु कुछ मामलों में ये जोखिम बढ़ जाता है.

कुछ कारक हैं जिसे देखकर ऐसे लोगों पर ख़ास नजर रखने की जरुरत है :

  • यदि आपके परिवार या कोई अन्य व्यक्ति यदि आपसे एक बार भी कभी ये कहे की वह आत्महत्या कर लेगा तो ऐसे व्यक्ति को हलके में नहीं लेना चाहिए. उसके behavior पर ख़ास नजर रखने की जरुरत है.
  • यदि किसी व्यक्ति को मानसिक विकार है.
  • यदि कोई व्यक्ति हमेशा उदास और निराशा से भरा हुआ रहता है.
  • अचानक मादक पदार्थों का सेवन में वृद्धि होना.
  • लोगों से दूर – दूर रहना अर्थात ज्यादातर समय अकेले में रहना पसंद करना.
  • उत्तेजित या गंभीर रूप से चिंतित होना
  • अचानक उसके सामान्य व्यवहार में बदलाव आना.
  • फ़िज़िकल अपियरेंस के प्रति उदासीन हो जाना (सामान्यतः ऐसे व्यक्ति को फर्क नहीं पड़ता कि वह कैसे दिख रहे हैं)

आपके मन में भी यदि ऐसे विचार आते हैं तो क्या करें?

डॉक्टरों की सलाह, व्यायाम करना, योग करना आदि आपको इन्टरनेट या अन्य माध्यमों से अनेकों सलाह मिल जायेंगे जो लाभदायक हैं किन्तु सबसे बड़ी बात जो मैं बताने जा रहा हूँ वह है ज़िन्दगी के प्रति खुद की नजरिया बदलना. हर कोई जो मानव जन्म लिया है उसे किसी न किसी रूप में मुसीबतों का सामना करना ही होगा, इसे कोई बदल नहीं सकता है. जिंदगी एक संघर्ष है और यहाँ आपको हार भी स्वीकार करना होगा.

व्यक्ति को आध्यात्मिक होना चाहिए क्योंकि इस धरा में मौजूद नकारात्मकता को आध्यात्म के द्वारा ही भगाया जा सकता है. आपको जिंदगी इसलिए नहीं मिली है कि आजीवन आपको सुख ही सुख प्राप्त हो ; आपकी सारी इच्छाएं यूँ ही पूरी होती रहे वरन इसलिए मिली है कि वीरों के भांति जिंदगी में मिली चुनौतियों का सामना कर खुद को उन्नत कर सकें.

आत्महत्या कायर व्यक्ति ही कर सकता है जो जिंदगी से हार मान लेता है. आपको जीवन का अवसर निखरने के लिए मिला है यूँ ही व्यर्थ गवानें के लिए नहीं. आत्महत्या जैसा क्रूर कदम उठाना अप्राकृतिक है इसलिए अत्यंत पीड़ादायक है इससे आपको किसी भी प्रकार के दुखों से मुक्ति नहीं मिल सकती है.

यदि आपकी जिंदगी में किसी भी प्रकार का परेशानी है जो आपको हमेशा बेचैन करती है तो उस परेशानी को अपने दोस्तों, परिवारवालों के साथ शेयर करें कभी भी खुद को मिटाने की भावना ना लायें. याद रखिये आपकी जिंदगी सिर्फ आपकी नहीं है इसके साथ कई लोगों की उम्मीदें, भावनाएं जुड़ी हुई है.

आप आत्महत्या करना क्यों चाहते हैं? इसलिए न, कि आप जैसी जिंदगी चाहते हैं वैसी नहीं है. तो एक बात ध्यान से समझ लें कि आप कभी भी जिंदगी के ऊपर अपनी इच्छा नहीं थोप सकते हैं. यह आपके लिए असंभव है. आप केवल प्रयास कर सकते हैं ; केवल कर्म कर सकते हैं. भाई मौत तो एक दिन जरुर आएगी आप इतनी जल्दी में क्यों हैं. जिंदगी एक सफ़र है बस उसके साथ चलते जाएँ. सफलता – असफलता, दुख – सुख, मान – अपमान, हार – जीत, गरीबी – अमीरी ये सभी हमारी जिंदगी का अहम् हिस्सा है इससे आप कभी अलग नहीं हो सकते.

अंत में मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ कि जो शब्द – आत्महत्या हमारे बीच प्रचलन में वह शब्द ही पूरी तरह से गलत है. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ कि आत्मा को किसी भी प्रकार से हत्या नहीं की जा सकती है ; हत्या तो देह की होती है इसे आप देह हत्या या स्वघात कह सकते हैं. हिन्दू धर्मं की मान्यताओं को मानें तो आत्‍महत्‍या करने के बाद का जो जीवन होता है वह और भी कष्टकारी होता है.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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