आयुर्वेद क्या है? इसकी उत्पत्ती, उद्देश्य, प्रमुख ग्रन्थ और विशेषताएं

आयुर्वेद क्या है? : ऐसा माना जाता है कि आयुर्वेद लगभग 5000 वर्ष पुरानी चिकित्षा पद्धति है. इसको पांचवा वेद के रूप में भी जानते हैं अर्थात इसको चार वेदों के अलावा पांचवें वेद के रूप में आयुर्वेद को माना जाता है.

अथर्ववेद में आयुर्वेद का विस्तृत वर्णन मिलता है तथा आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद माना गया है. संस्कृत में, आयुर्वेद का अर्थ है “जीवन का विज्ञान” और इस ज्ञान की उत्पत्ति भारत में हुई थी.

कई विद्वान इस बात से सहमत हैं कि आयुर्वेद सबसे पुराना उपचार विज्ञान है. यह प्राचीन वैदिक संस्कृति से उत्पन्न हुआ है और कई हजारों वर्षों तक मौखिक परंपरा के माध्यम से निपुण आचार्यों से उनके शिष्यों को पढ़ाया जाता था और बाद में इस ज्ञान को लिपिबद्ध किया गया लेकिन भी इसके अधिकांश भाग आज अप्राप्य हैं.

हाल के दिनों में, विशुद्ध रूप से प्राकृतिक विज्ञान होने के कारण, आयुर्वेद काफी लोकप्रिय हो रहा है. यह मूल रूप से प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थों पर आधारित उपचार पद्धति है. यह इसलिए भी ख़ास है क्योंकि यह विज्ञान समस्या की जड़ तक जाता है और समग्र रूप से इसका इलाज करता है.

एक ओर जहाँ आयुर्वेदिक दवाएं प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, अर्क और पौधों का उपयोग करके बनती हैं वहीँ एलोपैथिक दवा प्रयोगशालाओं में बनाई जाती है और हर एलोपैथिक दवा के थोड़ा बहुत साइड इफेक्ट होते हैं इसलिए भी कई लोग आयुर्वेदिक उपचार पर ज्यादा जोर देते हैं.

आज के समय में इसपर और भी ज्यादा रिसर्च होने की आवश्यकता है ताकि आजकल के नये – नये रोगों से लोगों को प्राकृतिक रूप से उत्तम उपचार दिया जा सके.

यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आयुर्वेद क्या है? इसकी उत्पत्ती, उद्देश्य, प्रमुख ग्रन्थ और इसकी विषेशताओं के बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख के साथ अंत तक जरूर बने रहें.

आयुर्वेद क्या है?

आयुर्वेद दो शब्दों से मिलकर बना है पहला आयु और दूसरा वेद जहां आयु का अर्थ है जीवन और वेद का अर्थ है जानना अथवा विज्ञान. शाब्दिक अर्थ में जीवन के विज्ञान को आयुर्वेद कहते हैं.

यह पूर्ण स्वस्थ जीवन प्राप्त करने की अद्भुत वैज्ञानिक विधि है. जीवन जीने की विद्या, जीवन जीने की प्रक्रिया, जीवन जीने की कला आयुर्वेद है.

इस प्रकार आप कह सकते हैं कि आयुर्वेद जीवन जीने की एक समग्र वैज्ञानिक पद्धति है. आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसे जीवन दर्शन के रूप में देखा जाता है.

आयुर्वेद जीवन को लम्बा करने का उपाय है. इसमें आहार, जीवनशैली, जड़ी-बूटियां और यहां तक ​​कि योग भी शामिल है.

आज आयुर्वेद को जीवन विज्ञान के रूप में देखा जा रहा है. आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान की वह विधि है जो व्यक्ति को स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करती है. इसके अनुसार जीवन के कुछ नियमों का पालन करके आप अपने शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त बना सकते हैं.

आयुर्वेद प्राचीन भारतीय नियमों पर आधारित एक चिकित्सा पद्धति है. आज दुनिया भर की वैज्ञानिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियाँ आयुर्वेद की ओर आकर्षित हो रही हैं.

आज लोग एलोपैथिक के दुष्प्रभावों से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपचार और आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग में रुचि दिखा रहे हैं. लोग इसे जीवन के विज्ञान के रूप में देख रहे हैं.

आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष अर्थात – वात, पित्त और कफ दोष संतुलित रहते हैं तो शरीर स्वस्थ रहता है. आयुर्वेद चिकित्सा की प्राचीन भारतीय प्रणाली है. आयुर्वेद योग ध्यान और विभिन्न चिकित्सा को नियंत्रित करने वाली हर्बल दवाओं के माध्यम से स्वास्थ्य को बनाए रखने और बिमारियों से लड़ने में मदद करता है.

यह सबसे पुरानी समग्र चिकित्सा प्रणालियों में से एक है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह हज़ारों साल पहले विकसित हुई थी. भारत में, आयुर्वेदिक प्रथाओं को आयुष मंत्रालय द्वारा नियंत्रित किया जाता है.

आयुर्वेद के प्रमुख ग्रन्थ कौन – कौन से हैं?

चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय और काश्यप संहिता आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ माने जाते हैं. इन ग्रंथों में आयुर्वेदिक औषधियों व उनके द्वारा होने वाले उपचार के बारे में जानकारी मिलती है.

इन ग्रंथों में हमें हमारे शरीर को प्रभावित करने वाले वाले पांच तत्वों अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि के बारे में बताया गया है.

यह ग्रन्थ स्वस्थ और आनंदमय जीवन के लिए पांच तत्वों को संतुलन में रखने के महत्व की व्याख्या करता है, साथ ही आयुर्वेद इन तत्वों को संतुलित करने के लिए प्राचीन भारतीय प्राकृतिक और समग्र वैदिक शास्त्र प्रणाली को प्रस्तुत करता है.

आयुर्वेद का उद्देश्य

आयुर्वेदिक का मुख्य उद्देश्य स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बीमार व्यक्तियों के विकारों को दूर करना और उन्हें स्वस्थ बनाना है.

आयुर्वेद हर किसी में मौजूद तीन बुनियादी मौलिक ऊर्जाओं वात, पित्त और कफ की पहचान करता है. अच्छे स्वास्थ्य के लिए इन तीनों ऊर्जाओं की संतुलन की आवश्यकता होती है.

आयुर्वेद का उपयोग अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए किया जाता है और हमारा उत्तम स्वास्थ्य तनाव को कम करता है और ताकत और सहनशक्ति में सुधार करता है. यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली अच्छे स्वास्थ्य के लिए उचित आहार पर जोर देती है.

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां शरीर को बीमारी से बचाते हैं और पाचन में सुधार जैसे स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करते हैं. आयुर्वेद असल में एक जीवन विज्ञान है. जीवन को जीने की कला है और इसका प्रमुख उद्देश्य रोगी को पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करके रोग को जड़ से समाप्त करना है.

आयुर्वेद की उत्पत्ती

आयुर्वेद की उत्पत्ति से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं. आयुर्वेद का इतिहास हजारों साल पुराना है और आयुर्वेद की शुरुआत का उल्लेख हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मिलता है. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार इसकी शुरुआत ब्रह्मा ने की थी.

सुश्रुत संहिता में आयुर्वेद के इतिहास का जिक्र है. सुश्रुत संहिता के अनुसार आयुर्वेद के हिंदू देवता धन्वंतरि ने खुद को वाराणसी के राजा के रूप में अवतरित किया और सुश्रुत सहित चिकित्सकों के एक समूह को आयुर्वेद की ज्ञान सिखाई और माना जाता है कि यहीं से आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा विचार विकसित हुआ और दुनिया से समक्ष आया.

आयुर्वेद की रचना वास्तव में किस काल में हुई, इस बारे में स्पष्ट राय किसी के पास नहीं है क्योंकि ऋग्वेद संहिता में भी आयुर्वेद का उल्लेख है फिर भी चरक, सुश्रुत, कश्यप ऋषियों के अनुसार आयुर्वेद वास्तव में अथर्ववेद का उपवेद ही है.

आयुर्वेद को देवताओं की चिकित्सा पद्धति के रूप में जाना जाता है और जब संसार की उत्पत्ति हुई थी, उसके साथ-साथ ही आयुर्वेद की रचना हुई थी. सर्वप्रथम इसे ब्रह्मा जी ने स्मरण किया था ब्रह्मा जी के पश्चात यह विद्या दक्ष प्रजापति, अश्विनी कुमारों और देवताओं के राजा इन्द्र के पास गई.

और इसके पश्चात भूमंडल पर जब रोग में वृद्धि होने लगी तब इसकी आवश्यकता महसूस हुई और हमारे ऋषि मुनियों ने अपनी तपस्या के बल पर इस पृथ्वी लोक पर आयुर्वेद को लाये तो इस तरीके से आयुर्वेद का अवतरण हुआ ऐसा माना जाता है.

आयुर्वेद से जुड़े वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि इस विज्ञान का उपयोग सिंधु घाटी सभ्यता में पाया जाता है और समय के साथ इसने और व्यापक रूप से प्रगति की है. खैर जो भी हो किन्तु इतना तो जरूर सत्य है कि आयुर्वेद हज़ारों वर्षों पुराना ज्ञान है जिसके बल पर प्रभावी तरीकों से रोगों का पूर्ण निदान संभव है.

आयुर्वेद वह चिकित्सा विज्ञान है, जिसमें मानव शरीर के रोगों और उन्हें रोग मुक्त बनाने के सभी तरीकों का वर्णन मिलता है.

आयुर्वेद की विशेषताएं

  • आयुर्वेद एक पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति है
  • आयुर्वेदिक दवाएं प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, अर्क और पौधों का उपयोग करती हैं.
  • यह उपचार का विशुद्ध प्राकृतिक तरीका है, जिससे मनुष्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है.
  • इसका उद्देश्य रोगों को जड़ से समाप्त करना है.
  • इसमें आहार, जीवनशैली, जड़ी-बूटियां और यहां तक ​​कि योग भी शामिल है.

Note:- आयुर्वेद पर यह लेख (आयुर्वेद क्या है) कुछ स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज लेने से पहले आपको किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से उचित सलाह जरूर लेनी चाहिए. हम नहीं जानते कि मौजूदा बीमारियों या गंभीर बीमारियों के संदर्भ में आयुर्वेदिक उपचार कितना कारगर है. इस मामले में आप स्वयं जानकारी हासिल करें.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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