Chanakya kaun the

आज का हमारा विषय है chanakya kaun the? आप सभी अर्थशास्त्र (Economics) से भलीभांति परिचित होंगे जिसका मतलब होता है धन का अध्ययन. यह संस्कृत भाषा के दो शब्दों को जोड़कर बना है – अर्थ+शास्त्र. निरंतर बढ़ते हुए समय के साथ-साथ अर्थ जगत में और इसके साथ ही अर्थशास्त्र के ज्ञान में भी वृद्धि हुई है. यह सामाजिक विज्ञानं का एक ऐसा शाखा है जिसके बिना किसी सभ्यता की कल्पना भी करना मुश्किल है.

अर्थशास्त्र

यह हमारे रोजमर्रा की जिंदगी की एक अति महत्वपूर्ण कड़ी है जिसके ज्ञान के सहारे हमारा समाज निरंतर विकास कर रहा है. धन से ही समाज को आगे बढाया जा सकता है इसके लिए धन का अध्ययन अनिवार्य है. हम आर्थिक विश्लेसन करके ही वर्तमान और भविष्य का निति निर्धारण कर सकते हैं. अनेक अर्थशास्त्री जैसे – हेन्स, लियोनेल रोबिनसन, जोयल डीन, एडम स्मिथ इत्यादि ने अर्थशास्त्र को अपनी – अपनी भाषा से परिभाषित किया है.

अर्थशास्त्र और चाणक्य

आपने पढ़ा या सुना होगा की एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का पिता कहा जाता है जो बेशक वो हैं क्यूंकि आधुनिक अर्थशास्त्र के विकास में उनका योगदान अविशवसमरनीय है. दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और इतिहासकारों को उन्होंने अपने ज्ञान से प्रभावित किया मुख्य रूप से उनकी पुस्तक ” The Theory of Moral Sentiments” ने अनेक बुद्धिजीवियों का ध्यान आकृष्ट किया है.

दुनिया आज भी एडम स्मिथ से प्रेरणा लेती है. अठारहवीं सदी में उनका योगदान महत्वपूर्ण है जिसके कारण ही उन्हें अर्थशास्त्र का पिता कहा जाता है किन्तु इनके योगदान से बहुत पहले एक ऐसा नीतिज्ञ या ज्ञानी जिसे दुनिया चाणक्य, कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नामों से जानती है जिनके द्वारा अर्थशास्त्र जैसे महान ग्रन्थ की रचना मौर्यकाल में ही हो चूका था जो आज भी प्रभावपूर्ण है. आज हम वही चाणक्य के बारे में जानेंगे.

चाणक्य की संक्षिप्त विवरणी

अर्थशास्त्र, अर्थनीति, समाजनीति, कृषि आदि जैसे महान ग्रंथों के रचियेता चाणक्य का जन्म एक निर्धन परिवार में हुआ था. इनके जन्म के विषय में स्पष्ट उल्लेख नहीं है फिर भी अनुमानतः 375 ईसापूर्व और मृत्यु 283 ईसापूर्व है. चाणक्य तक्षशिला के निवासी थे. निःसंदेह वे अपने समय के प्रमुख विद्वानों में से एक थे जिनकी शिक्षा उस समय के उत्कृष्ट शिक्षा केंद्र ‘तक्षशिला’ में हुई थी.

चाणक्य मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे. उन्होंने शिक्षण का भी कार्य किया. राजनीति, कूटनीति और अर्थशास्त्र के वे एक प्रखर विद्वान् थे. भारतीय इतिहास में उनके समान कूटनीतिज्ञ दूसरा और कोई नहीं है ऐसा माना जाता है. उनके द्वारा रचित पुष्तक ‘अर्थशास्त्र’ में दिए गए राजनैतिक सिद्धांत वर्तमान समय में भी स्वीकार्य है.

चाणक्य, कौटिल्य और विष्णुगुप्त

उनकी कृति जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं की वो महान चाणक्य ही थे जिन्होंने नन्द वंश का नाश करके मौर्य वंश की नीव रखी और चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया. इनके पिता का नाम चणक था जो की एक गरीब ब्राम्हण थे. कुछ विद्वानों का मत यह भी है की चणक का पुत्र होने के कारण ही वे चाणक्य कहलाये. एक मत के अनुसार उनका जन्म पंजाब के चणक क्षेत्र में हुआ था इसलिए चाणक्य नाम पड़ा.

कुटिल वंश में जन्म लेने के कारण वे कौटिल्य कहलाये. उनके जन्मतिथि, जन्मस्थान और नाम ये तीनो ही विवाद का विषय रहा है. इस विषय को लेकर विद्वानो के बीच हमेशा मतभेद रहा है. कुछ विद्वान् उनका मूल नाम विष्णुगुप्त ही मानते है किन्तु जो हो, चाणक्य, कौटिल्य और विष्णुगुप्त ये तीनो नाम एक ही व्यक्ति के हैं. कथासरित्सागर, भागवत, विष्णुपुराण, बौध आदि ग्रंथों में चाणक्य का नाम आया है.

भारत का मक्यावली

मुझे वाद-विवाद में नहीं पड़ना है, आज के लेख में मैं केवल चाणक्य के उन गुणों को प्रकाशित करने का प्रयास करूँगा जिसके कारण संसार आज भी उनसे प्रेरणा लेती है . विभिन्न सूत्रों से हमें पता चलता है की चाणक्य एक यथार्थवादी पुरुष थे. एक अत्यंत ही स्वाभिमानी और क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति, शारीर से मजबूत और काला रंग. उनकी प्रतिभा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है, केवल कहा जा सकता है.

बहुआयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति जिनकी दूरदर्शिता का आभाष उनके कृतियों को अवलोकन करने से प्राप्त होता है. क्या आप जानते हैं की चाणक्य को भारत का मक्यावली क्यों कहा जाता है? चाणक्य को भारत का मक्यावली कहा जाता है इसे विस्तार से समझना जरुरी है.

मक्यावली कौन थे

मक्यावली इटली का एक दार्शनिक था जिसका जन्म 1469 में यूरोप के फ्लोरेंस में हुआ था. दार्शनिक होने के साथ-साथ वे एक कवी, नाटककार, राजनितिक विश्लेषक और कूटनीतिज्ञ थे. अपने समय के वे एक प्रमुख व्यक्तित्व थे जो वहां के गणराज्य यानि फ्लोरिडा चांसलेरी के सचिव चुने गए. जब किसी भी व्यक्ति में कुछ अनोखापन होता है, कुछ नया करने की शक्ति होती है जो क्रांति ला दे तो संसार उसका अनुसरण जरूर करती है.

‘द प्रिंस’ क्या है?

मक्यावली को प्रसिद्ध होने का मुख्य कारण उनकी रचना ‘द प्रिंस’ है जो की एक राजनितिक व्यवहार की एक छोटी सी पुष्तक है जिसमे राजनितिक गुर बताये गए हैं जैसे सत्ता को हासिल करने से लेकर उसे कैसे कायम रखा जाये, एक शासक को अपने सत्ता में बने रहने के लिए क्या करना चाहिये, मुद्राकोष को कैसे संतुलित रखा जाये, एक राजा का गुण कैसा होना चाहिये, इत्यादि.

‘द प्रिंस’ राजनितिक विज्ञान

इसप्रकार ‘द प्रिंस’ राजनितिक विज्ञानं का एक अनूठी पुष्तक माना जाता है. उन्हें पुनर्जागरण का नायक माना जा सकता है. मक्यावली का मुख्य सिद्धांत था की राज्य को कायम रखने के लिए उचित या अनुचित किसी भी प्रकार का उपाय करना चाहिये. यदि दूसरों को हानि पहुंचाकर राज्य की वृद्धि होती है तो उसे करना चाहिये क्यूंकि वे राष्ट्र को ही सब कुछ मानते थे.

अपने साध्य की सिद्धि के लिए नैतिक या अनैतिक आश्रयों का सहारा लेकर भी अपने प्रयोजन को सिद्ध करना एक राजा का कर्तव्य है. देश की सीमा वृद्धि करने के लिए वे युद्ध का भी पक्षधर थे जो उनके अनुसार राष्ट्र नीति का एक आवश्यक अंग है. एक राजा को दृढ़तापूर्वक अपने प्रजा के ऊपर शासन करना चाहिये.

चाणक्य भारत का मक्यावली

अब बात करते हैं आचार्य चाणक्य की कि उनमे ऐसी कौन सी सामानताएं थी जो उनको भारत का मक्यावाली कहा जाता है. एक बात मैं यहाँ पर स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि दोनों के सिद्धांतों में समानताएं हो सकती है किन्तु दोनों के प्रयोजनों में भिन्नताएं जरुर है.

चाणक्य कि कूटनीति

चाणक्य के बारे में पढने के बाद हमे पता चलता है की कौटिल्य नीति के अंतर्गत शत्रु को नाश करने के लिए अनुचित उपायों का वर्णन है किन्तु किस परिपेक्ष्य में इसे भी विस्तार से जानना जरुरी है. कौटिल्य के अनुसार कूटनीति का प्रयोग केवल दुष्ट और अधार्मिक लोगों पर ही करनी चाहिये. अधार्मिक शत्रुओं को नष्ट करने के लिए कूट विद्या का प्रयोग किया जा सकता है.

कौटिल्य का राज्यनीति सिद्धांत

आचार्य चाणक्य और मक्यावली दोनों ही का उद्देश्य केवल राष्ट्र था. वे राष्ट्र को ही सब कुछ समझते थे. दोनों ही के द्वारा राष्ट्र की अभिवृद्धि करने के पक्ष पर जोर दिया गया अर्थात शत्रुओं को दमन (विभिन्न उपायों को अपनाकर) करके राज्य का विस्तार करना. उनके मतानुसार एक राजा का एकमात्र लक्ष्य अपने साध्य की सिद्धि करना तथा दृढ़तापूर्वक शासन करना चाहिये.

कौटिल्य का राज्यनीति सिद्धांत धर्मं का कभी विरोध नहीं करता लेकिन बहुत अधिक धार्मिकता की ओर झुका हुआ भी नहीं है. उनके राजनीति में सामान्य नैतिक बंधन नहीं है बल्कि उससे मुक्त है. सामान्य नैतिक बंधन नहीं होने के कारण ही उनके विचार मक्यावली से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं फलस्वरूप उन्हें भारत का मक्यावली कहा जाता है. चाणक्य का राजनीति सिद्धांत चिंतन हेतु एक महत्वपूर्ण विषय है.

चाणक्य का अर्थशास्त्र

पाश्चात्य देश के लोग चाणक्य के अर्थशास्त्र के पहुँच के पहले तक यही समझते थे की भारतीय इस प्रकार के विषयों से अनभिज्ञ हैं किन्तु जब इस महान ग्रन्थ की पहुँच सुलभ हो गए तो पाश्चात्यों और साथ ही साथ भारतियों विद्वानों में भी तहलका मच गयी. कौटिल्य रचित अर्थशास्त्र संस्कृत की एक महान पुष्तक है जिसमे कृषि, न्याय, राजनीति आदि व्यस्थाओं पर विचार व्यक्त किया गया है.

राजनैतिक चिंतन हेतु यह एक प्रसिद्ध ग्रन्थ है. संभवतः चाणक्य द्वारा इस ग्रन्थ का रचना चन्द्रगुप्त के राजकीय उपयोग के लिए हुआ था. इस ग्रन्थ की महत्ता को देखते हुए कई विद्वानों ने अपने अथक प्रयासों के द्वारा इसकी व्याख्या और विवेचन किया है.

आशा करता हूँ आज का लेख chanakya kaun the? आपको पसंद आई होगी. धन्यबाद.

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