Microfinance kya hai? विस्तार से जानिए इसके कारण ग्रामीण जीवन कैसे बदल रहा है.

Microfinance kya hai? हो सकता है ‘micro finance’ जैसे शब्दों से बहुत सारे लोग अनजान हो सकते हैं. खासतौर पर ग्रामीण लोग जो कम पढ़े – लिखे लोग या अनपढ़ लोग होते हैं finance, बैंक सम्बंधित जानकारी आदि विषयों को ठीक से समझ नहीं पाते हैं फलस्वरूप बहुत सारी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं.

हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए micro finance की अवधारणा बहुत ही लाभदायक है. हमारे समाज के गरीब, पिछड़े या वंचित लोगों को इस अवधारणा से अत्यधिक लाभ प्राप्त हो रहा है. हमारे समाज के बेहतर वित्तीय स्थिति से ही देश का विकास निर्भर करता है. इसे हिंदी भाषा में सूक्ष्म-वित्त कह सकते हैं. तो आईये विस्तार से जानते हैं माइक्रोफाइनेंस क्या है?

माइक्रोफाइनेंस क्या है? Microfinance kya hai?

Micro Finance के अंतर्गत ग्रामीण जनताओं की विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटी – छोटी वित्तीय सुविधाएँ प्रदान करने की व्यवस्था की जाती है. इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना कामकाज शुरू करने के लिए कर्ज दिए जाते हैं. भले ही कर्ज की रकम इसमें छोटी होती है किन्तु यह सुविधा रोजगार उत्पन्न करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो रही है. कृषि, डेयरी, पॉटरी, टेलरिंग, पॉल्ट्री छोटी दूकान, पशुपालन या अन्य किसी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए इसतरह के कर्ज का लाभ उठाया जा सकता है.

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माइक्रोफाइनेंस संस्थान की कार्यप्रणाली?

Micro Finance, इसके तहत दी जानेवाली रकम भले ही छोटी होती है किन्तु ये भी सत्य है कि इसके जरिये ही कामयाबी की राह खोजी गयी. बड़े – बड़े कर्जदार जैसे बड़े बैंकों के लिए सरदर्द बने हुए हैं वहीँ दूसरी ओर Micro Finance कम्पनियाँ प्रत्येक वर्ष कारोबार में वृद्धि कर रही है. ये कोई चिटफण्ड कंपनी नहीं है जो लोगों का पैसा लेकर भाग जाएगी क्योंकि MFI सिर्फ कर्ज दे सकती है लोगों का पैसा जमा नहीं कर सकती है.

Micro Finance कम्पनियों की कार्यप्रणाली पारम्परिक बैंकिंग प्रणाली से भिन्न है. इस क्षेत्र में सम्बंधित वित्तीय संस्थानों द्वारा एक अधिकारी को नियुक्त किया जाता है. यह नियुक्त किया गया अधिकारी लोगों के समूह के संपर्क में रहता है और आवेदक की आवश्यकताओं को समझते हुए उसी आधार पर अंतिम राशि तय करता है. ऋण लेनेवालों को भी माइक्रोफाइनेंस संस्थानों द्वारा निर्धारित की गयी कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है.

वास्तव में माइक्रोफाइनेंस संस्थान उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन लोगों की पहुँच बैंकों तक नहीं है. इसके जरिये कम आय वाले लोग अपने पैरों पर खड़े होते है. माइक्रोफाइनेंस संस्थानों का काम केवल ऋण देना नहीं होता है बल्कि उधारकर्ता का साथ तब तक नहीं छोड़ते हैं जब तक वे स्वयं अपना कारोबार चलाने के लिए सक्षम नहीं हो जाते हैं. यही एक विशेष कारण है कि हमारे देश में MFI कंपनियों की सफलता दर अधिक है.

माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं का पंजीकरण गैर सरकारी संगठन (सहकारी या ट्रस्ट) के तौर पर होता है जो कंपनी अधिनियम के सेक्सन 25 के अधीन होता है. इसके द्वारा ऋण देने का मुख्य उद्देश्य आय सृजन करना है. इसके तहत ऋण एक व्यक्ति या व्यक्ति के समूह को लघु अवधि के लिए दिया जाता है और इसकी सबसे ख़ास बात यह होती है कि ऋण की पुनः चुकौती उच्च स्तर पर होती है. पुनः चुकौती उच्च स्तर पर कहने का तात्पर्य यह है है इसमें चुकौती दर 94/95 प्रतिशत से भी अधिक है.

भारत के कुछ शीर्ष माइक्रोफाइनेंस कम्पनियाँ

  • Annapurna Microfinance Pvt. Ltd.
  • Cashpor Micro Credit (CMC)
  • Bandhan Financial Services Pvt. Ltd.
  • Asirvad Microfinance Pvt Ltd.
  • Disha Microfin Pvt Ltd.
  • Equitas Microfinance Pvt Ltd.
  • Spandana Sphoorty Financial Ltd.
  • Asmitha Microfin Ltd.

Microfinance से सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां

  • MFI सिर्फ कर्ज देती है पैसा जमा करने का काम नहीं करती है.
  • Microfinance कम्पनियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक की देखरेख में काम करती है.
  • कर्ज लेनेवालों को आश्वस्त करना पड़ता है कि कर्ज किस कार्य के लिए लिया जा रहा है.
  • इसके तहत कर्ज वंचित आय वर्ग वाले लोगों को दिया जाता है इसमें से अधिकांश लोगों के पास तो बैंक खाता तक नहीं होता है.
  • माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं व्यावहारिक रूप से महिलाओं को कर्ज देने का कार्य करती है.
  • इसमें कर्ज वापसी साप्ताहिक/मासिक आधार पर किया जाता है.
  • माइक्रोफाइनेंस संस्थान लोगों को वर्तमान बाज़ार के रूझानों के बारे में शिक्षित करने का कार्य भी करती है जो market competition के लिए लोगों को तैयार करने में सहायक होते हैं.
  • इसमें ऋण लेने के लिए किसी भी प्रकार का गारंटी नहीं देना पड़ता है.
  • एक बात का ध्यान और रहे कि सभी माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं एक जैसे काम नहीं करते हैं. इनमें से प्रत्येक के  कार्य – प्रकृति में भिन्नताएं हो सकती है.
  • कोई भी ग्राहक लिए गये ऋण को चुकाने के बाद पुनः ऋण ले सकता है.

Microfinance : अंत में हमारा निष्कर्ष

एक ओर जहाँ Microfinance कम्पनियाँ वित्तीय सेवाएं प्रदान करने का कार्य कर रही है वहीँ दूसरी ओर गरीब और वंचित वर्ग की मदद करके देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का कार्य भी कर रही है. साथ ही साथ ये कम्पनियाँ लोगों को धन का समुचित उपयोग करने के बारे में भी शिक्षित कर रही है.

माइक्रोक्रेडिट माइक्रोफाइनेंस के लिए एक और शब्द है जिसका प्रयोग भी लोगों के द्वारा किया जाता है. हम सभी जानते हैं कि कम आय वाले वंचित लोगों को आसानी से अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का अवसर प्राप्त नहीं होता है. ऐसे लोग बैंक ऋण के लिए भी योग्य नहीं होते हैं. ऐसे लोग ही Microfinance कंपनियों से वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं.

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