Private Limited Company kya hoti hai

Private Limited Company क्या होती है? कंपनी कैसे रजिस्टर करें?

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Private Limited Company क्या होती है? प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कैसे रजिस्टर करें? : हमारी पिछली लेख में हमने आपको Proprietorship फर्म के बारे में बताया था. आपको बता दें कि अपने पसंदीदा क्षेत्र के अंदर व्यापार करने के लिए company registration करना एक क़ानूनी प्राधिकरण होता है. कई प्रकार से कंपनी रजिस्ट्रेशन किये जाते हैं जैसे – Private limited company, Sole proprietorship, Public limited company, One person company, Section 8 company आदि.

Private Limited Company क्या होती है? भारत में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी रजिस्टर करने की प्रक्रिया क्या है? भारत में कंपनी पंजीकरण के लिए कौन से कानून और नियम आवश्यक हैं? इसके बारे में आप यदि विस्तारपूर्वक पूरी बातें समझना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए काफी उपयोगी हो सकती है, इसीलिए कृपया इस लेख के साथ अंत तक जरूर बने रहें.

Private Limited Company शुरू करने के लिए न्यूनतम 2 सदस्यों का होना आवश्यक होता है. यदि कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत करना चाहता है तो इसमें प्रोपराइटरशिप के मुकाबले प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है और इसमें कई अनुपालन शामिल होते हैं. पूरी पंजीकरण प्रक्रिया की यदि समझ हो तो काम काफी आसान हो जाता है.

तो आइये, इसके बारे में विस्तारपूर्वक समझते हैं –

Private Limited Company क्या होती है?

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (68) में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को परिभाषित किया गया है. यह निजी (Private) लोगों की स्वामित्व वाली कंपनी होती है. इसकी स्थापना के लिए न्यूनतम दो लोगों का होना जरुरी होता है और इसमें सदस्यों की अधिकतम संख्या दो सौ तक हो सकती है जहाँ प्रत्येक सदस्य या शेयरधारकों की देयता सीमित है. कंपनी register करवाने के लिए कई तरह के अलग अलग fees या charges भरने पड़ते हैं.

Private Limited Company का प्रबंधन दो निदेशकों (directors) द्वारा किया जाता है अर्थात दो निदेशकों के अस्तित्व के साथ एक निजी कंपनी का सञ्चालन किया जा सकता है. इसमें समझने के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार की कंपनी को अपने शेयर पब्लिक या आम लोगों को बेचने की अनुमति नही होती है.

भारत में व्यवसाय शुरू करने के लिए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पंजीकरण करना एक लोकप्रिय तरीका है. इसके संस्थापकों को सीमित देयता संरक्षण, अलग कानूनी इकाई, विश्वसनीयता और बाहरी फण्ड जुटाने में आसानी जैसे लाभों के कारण यह छोटे अथवा मध्यम आकर के बिज़नेस के लिए काफी अच्छा माना जाता है.

ऐसी कंपनियों के नाम के अंत में प्राइवेट लिमिटेड लिखा रहता है जिसे एक निजी स्वामित्व वाली कंपनी माना जाता है. वास्तव में यह संयुक्त स्टॉक वाली कंपनी है. ऐसी कंपनियों में लाभ प्रत्येक शेयरधारकों को कंपनी के शुद्ध लाभ में से उनके द्वारा लगाई गयी पूंजी के अनुपात में वितरित किया जाता है. हानि होने की स्तिथि में प्रत्येक शेयरधारकों को इसी अनुपात में नुकसान सहन करना पड़ता है.

Private Limited Company की विशेषताएं

  • एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा शासित है.
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए कम से कम 2 लोगों (निदेशकों) की आवश्यकता होती है.
  • कंपनी अधिनियम के अनुसार सदस्यों की अधिकतम संख्या 200 हो सकती है.
  • इस प्रकार की कंपनी को अपने शेयर आम जनता को बेचने की अनुमति नहीं है.
  • कंपनी के नाम के अंत में ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्द रहता है.
  • लाभ शेयरधारकों द्वारा लगायी गयी पूंजी के अनुपात में वितरित किया जाता है.
  • Private limited का संक्षिप्त रूप Pvt. Ltd. होता है.

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए आवश्यकताएँ

ज्ञात हो कि भारत में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पंजीकरण खासतौर पर स्टार्टअप्स के लिए कानूनी व्यवसाय संरचना का सबसे लोकप्रिय रूप माना जाता है. आपको बता दें कि किसी भी प्रकार का व्यवसाय शुरू करने के लिए कुछ जरुरी आवश्यकताओं को पूरा करना पड़ता है. इसीप्रकार आइये जानते हैं कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए आवश्यकताएँ क्या – क्या होते हैं –

  • कंपनी अधिनियम 2013 द्वारा अनिवार्य रूप से यह वैधानिक आवश्यकता है कि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए न्यूनतम दो लोगों या निदेशकों की आवश्यकता होती है जिसकी सदस्यों की अधिकतम सीमा 200 हो सकती है.
  • निदेशकों की पहचान संख्या होनी चाहिए, जिसे DIN (director identification number) नंबर कहा जाता है. जो व्यक्ति कंपनी का निदेशक बनना चाहता है उसे DIN नंबर प्राप्त करना होगा.
  • दो निदेशकों में से एक भारत का निवासी होना चाहिए.
  • कानून अनुसार कंपनी का नाम चुनें जिसके अंत में ‘प्राइवेट लिमिटेड का उल्लेख होना चाहिए. इसके लिए कंपनी के रजिस्ट्रार (ROC) के अनुमोदन के लिए 5-6 नाम भेजने पड़ सकते हैं. ऐसा इसलिए करना पड़ता है क्योंकि किसी भी दो कंपनियों का एक ही नाम नहीं हो सकता है.
  • स्थान या पंजीकृत कार्यालय का पता होना किसी भी व्यवसाय के लिए जरुरी होता है. यह स्थान या तो आपका अपना हो सकता है, किराये का हो सकता है या लीज पर हो सकता है. किसी भी कंपनी के मुख्य मामलों का संचालन पंजीकृत कार्यालय से ही किया जाता है.
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज होने चाहिए. आजकल ऑनलाइन का जमाना है और आपको बता दें कि पंजीकरण प्रक्रिया भी ऑनलाइन है. आपको कई महत्वपूर्ण कार्यों को पूर्ण करने के लिए Digital Signature की आवश्यकता होगी इसीलिए इसे प्राप्त करें. फॉर्म में डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए यह अनिवार्य है. आप सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणन प्राधिकरणों से डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • पता का पहचान (आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, बिजली बिल, टेलीफोन बिल आदि)
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • व्यवसाय का पता प्रमाण (यूटिलिटी बिल, रेंट एग्रीमेंट और एनओसी)
  • निदेशकों से घोषणा (Declaration)
  • पासपोर्ट – विदेशी नागरिकों के मामले में, पहचान के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट अनिवार्य रूप से आवश्यक है.
  • एड्रेस प्रूफ विदेशी नागरिकों के लिए सरकार द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र जिसमें पता हो, बैंक विवरण आदि)

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कैसे रजिस्टर करें?

जब आप कंपनी का नाम तय कर लेते हैं तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कैसे रजिस्टर करने के लिए आपको निम्न परिक्रियाओं से गुजरना होगा –

  • DSC (Digital Signature Certificate) के लिए आवेदन करें
  • DIN (Director Identification Number) के लिए आवेदन करें
  • जब आप कंपनी का नाम तय कर लेते हैं तो उस नाम उपलब्धता के लिए आवेदन करें
  • MOA (Memorandum of Association) और AOA (Articles of Association) फाइल करें
  • निगमन प्रमाणपत्र (incorporation certificate) प्राप्त करें
  • कंपनी के लिए PAN और TAN के लिए आवेदन करें
  • कंपनी के नाम पर चालू बैंक खाता (current bank account) खोलें

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के फायदे

1) कंपनी की शुरुआत – प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मिनिमम दो मेंबर्स के साथ शुरुआत की जा सकती है. यह स्वेच्छा से बनाए गए व्यक्तियों का एक संघ है.

2) अलग क़ानूनी पहचान होना – यह एक अलग कानूनी इकाई होती है जो आपसे अलग है अर्थात व्यवसाय की संपत्ति और देनदारियों, के प्रबंधन के लिए कंपनी जिम्मेदार होती है और नुकसान होने की स्तिथि में भी कंपनी जिम्मेदार होगी आप नहीं.

3) सिमित दायित्व – एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में, प्रत्येक सदस्यों की देयता सीमित होती है इसका अर्थ यही हुआ कि कंपनी के ऋण की भुगतान करने के लिए इसके सदस्यों की व्यक्तिगत संपत्ति का उपयोग नहीं किया जायेगा. वे कंपनी की देयता के लिए केवल अपने द्वारा किए गए योगदान की सीमा तक ही भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे, उनकी कोई व्यक्तिगत देनदारी नहीं होती है.

4) निर्बाध अस्तित्व में बने रहना – इसके किसी सदस्य की मृत्यु होने पर, कंपनी छोड़ने के बावजूद यह अस्तित्व में बनी रहती है. यह इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है.

5) व्यवसाय को पेशेवर छवि प्रदान करना – एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी व्यवसायों को एक पेशेवर छवि देती है, जिसके कारण व्यवसाय बाजार में आकर्षक होता है.

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का नुकसान

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के महत्वपूर्ण फायदों के बारे में तो आप समझ चुके हैं किन्तु इसके कुछ नुकसान भी हैं जैसे इसके लिए कम से कम दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है आप चाहकर भी व्यवसाय का संचालन अकेले नहीं कर सकते हैं.

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को पंजीकृत करने में की प्रक्रिया और लागत प्रोपराइटरशिप के मामले में थोड़ा जटिल है. इसका पंजीकरण प्रक्रिया में औसतन लगभग 10 – 15 दिन या इससे अधिक लग सकते हैं.

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कई औपचारिकताओं का अनुपालन करना पड़ता है जैसे बोर्ड की बैठकें आयोजित करना, वैधानिक रजिस्टर बनाए रखना, कर और श्रम कानूनों का अनुपालन करना आदि.

अन्य महत्वपूर्ण बात

यदि आप भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू करना चाहते हैं तो इसके नियम एवं कानून को आपको पालन करना पड़ेगा. किसी भी पंजीकृत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कम्पनी अधिनियम 2013 की अनुपालन करनी पड़ती है. जैसा कि आप समझ चुके हैं कि इसे संचालित करने के लिए कम से कम दो सदस्य होने चाहिए और इसमें अधिकतम दौ सौ सदस्य हो सकते हैं.

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में निदेशक (Director) वह व्यक्ति होता है जो कंपनी के मामलों का मुखिया होता है. कंपनी को सुचारू रूप से संचालित करने की पूरी जिम्मेदारी इनके पास होती है. हालाँकि कंपनी के निदेशक कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे – management director, executive director, general director आदि और सबकी अपनी – अपनी जिम्मेदारी होती है.

नोट : – कंपनी अधिनियम 1956 हो या कंपनी अधिनियम 2013 इन सब का विस्तृत ज्ञान अथवा जानकार Company Secretary, Chartered Accountant या Cost Accountant जैसे पेशेवर होते हैं. विस्तृत जानकारी के लिए इनसे जरूर संपर्क करें. इसे पंजीकृत करने के लिए आपको इनकी परामर्श की आवश्यकता पड़ सकती है.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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