proprietorship kya hota hai

Proprietorship क्या होता है? प्रोपराइटरशिप फर्म रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

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Proprietorship क्या होता है? : भारत में प्रोपराइटरशिप फर्म का पंजीकरण कैसे करें? इस सवाल का यदि जवाब चाहते हैं तो यह लेख शुरुआती लोगों के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है. इसीलिए अंत तक जरूर बने रहें. आगे बढ़ने से पहले आपको एक महत्वपूर्ण बात बता देना चाहता हूँ कि किसी विशिष्ट कानून द्वारा शासित नहीं होने के कारण प्रोपराइटरशिप भारत में किया जाने वाला व्यवसाय का सबसे आसान रूप माना जाता है.

Sole Proprietorship व्यवसाय का ऐसा रूप है जो देश में व्यवसायियों के बीच सबसे अधिक पसंद किया जाता है. इसका कारण यह भी है कि यह भारत में व्यापार करने का सबसे आसान तरीका है. यह एक व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला व्यवसाय है अर्थात इसमें व्यवसायिक निर्णय और उसका प्रबंधन करना एक ही व्यक्ति के हाथ में होता है.

Sole Proprietorship को आप इसतरह से समझ सकते हैं कि यहाँ मालिक और व्यवसाय इकाई के बीच कोई अंतर नहीं होता है. यह व्यवसाय का प्रकार उन व्यवसायियों के लिए फायदेमंद साबित होता है जो न्यूनतम क़ानूनी अनुपालन, कम पूँजी लागत, आसान सेटअप प्रक्रिया के साथ अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं.

आइये इसके बारे में विस्तारपूर्वक समझते हैं –

Proprietorship क्या है?

Sole proprietorship अर्थात ‘एकल स्वामित्व वाली फर्म’ और जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि यह एक व्यक्ति का स्वामित्व वाला व्यावसायिक इकाई है. और जब इस प्रकार के व्यवसाय में एक ही व्यक्ति व्यवसाय का स्वामी होता है इसलिए सभी व्यवसायिक क्रियाकलापों पर नियंत्रण उसी का होता है जैसे व्यवसाय सम्बंधित किसी भी प्रकार का निर्णय लेना और उसका प्रबंधन करना उसी के हाथ में होता है.

वास्तव में Sole proprietorship व्यवसाय का एक ऐसा रूप है जो प्रमुख रूप से किसी विशेष कानून द्वारा शासित नहीं होता है. व्यक्ति न्यूनतम कानूनी तथा अन्य औपचारिकताओं को पूरा करके सरलता से इसे स्थापित कर सकता है.

इस प्रकार के व्यवसाय में मालिक और व्यवसाय इकाई के बीच कोई अंतर नहीं होता है. यह कोई क़ानूनी इकाई नहीं है. वास्तव में यह अपने मालिक के नाम से काम कर सकता है या व्यापार के लिए एक कल्पित नाम का उपयोग कर सकता है. एकल स्वामित्व वाली फर्म को किसी विशिष्ट पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है इसमें व्यक्ति का व्यापार उसके नाम से पंजीकृत हो जाता है. इसमें निगमन का कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है.

जैसा कि आप समझ चुके हैं कि प्रोपराइटरशिप फर्म के लिए, प्रोपराइटरशिप फर्म पंजीकरण आवश्यक नहीं होती है उसे केवल अपना नाम पंजीकृत करना होगा. प्रोपराइटरशिप के रूप में काम करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज चाहिए जैसे –

Proprietorship के लिए आवश्यक दस्तावेज

Proprietorship फर्म रजिस्टर करने के लिए न्यूनतम दस्तावेजों की आवश्यकता होती है जो निम्न हैं –

  • आधार कार्ड (Aadhar card)
  • फोटोग्राफ्स (Photographs)
  • बैंक स्टेटमेंट कॉपी (Bank statement copy)
  • स्वयं का पैन कार्ड (PAN card)
  • पता प्रमाण (Address Proof) जैसे – बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट आदि.
  • चालू खाता (Current account)

उपरोक्त दस्तावेजों के अलावा एक proprietorship फर्म स्थापित करने के लिए कुछ पंजीकरण (registration) आवश्यक होते हैं जैसे –

  • जीएसटी पंजीकरण (GST Registration)
  • शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट लाइसेंस (shop and establishment license)
  • एमएसएमई/उद्यम पंजीकरण (MSME / Udyam Registration)

आपको बता दें कि sole proprietorship फर्म के लिए प्रोपराइटरशिप फर्म पंजीकरण आवश्यक नहीं होती है किन्तु एकल स्वामित्व वाली फर्म को सुचारु रूप से संचालन करने हेतु कुछ आवश्यक पंजीकरण कर लेना चाहिए जैसे जीएसटी पंजीकरण, शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट लाइसेंस, एमएसएमई/उद्यम पंजीकरण आदि. आइये इसके बारे में विस्तारपूर्वक समझने का प्रयास करते हैं.

  1. GST पंजीकरण किसके लिए आवश्यक है?

    Goods and Services Tax (GST) रजिस्ट्रेशन केवल तभी आवश्यक है जब माल की आपूर्ति (supplying goods) करने वाले व्यवसाय जिनका एक वित्तीय वर्ष में 40 लाख रुपये से अधिक का कारोबार होता है उनके लिए जरुरी है. उत्तर-पूर्वी राज्यों के मामलों में जैसे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इसकी सीमा 10 लाख रुपये है. वहीं सेवा प्रदाताओं (service providers) के लिए टर्नओवर सीमा 20 लाख रूपये हैं तथा किसी विशेष श्रेणी के राज्यों के मामले में यह सीमा 10 लाख रूपये हो सकती है. यदि फ्लिपकार्ट, अमेज़ॅन आदि के माध्यम से ऑनलाइन व्यापार कर रहे हैं तो वहां जीएसटी नंबर जरुरी होता है.

  2. Shop and establishment license क्यों जरुरी होता है?

    यह लाइसेंस व्यवसाय और कर्मचारियों की संख्या के आधार पर स्थानीय कानूनों के अनुसार जारी किया जाता है. इसकी पंजीकरण प्रक्रिया अपने – अपने राज्य के अनुसार निर्भर करती है. ज्ञात हो कि एक राज्य से दूसरे राज्य में, दुकान और प्रतिष्ठान पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया बदल जाती है.

  3. MSME / Udyam Registration क्यों आवश्यक होता है?

    आपको बता दें कि एमएसएमई पंजीकरण करना अनिवार्य नहीं होता है फिर भी यह सलाह दी जाती है कि इसका पंजीकरण करा लेना चाहिए क्योंकि इसके कई फायदे हो सकते हैं. व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त करने में यह सहायक हो सकती है साथ ही सरकार द्वारा MSME के लिए कई योजनाएं भी चलायी जाती है जिसके तहत रियायती ब्याज दरों पर ऋण प्राप्त किया जा सकता है.

Registered Office प्रमाण

कई प्रक्रियाओं को सरलता से पूरा करने के लिए पंजीकृत कार्यालय का पता प्रमाण जरुरी हो सकता है. व्यवसायिक कामकाज के लिए कार्यालय का पता देना पड़ता है जैसे –

  • कार्यालय किराए की संपत्ति (Rented Property) में होने की स्तिथि में – इस स्तिथि में कार्यालय का पता प्रमाणित करने के लिए मकान मालिक से रेंट एग्रीमेंट (Rent agreement) और एनओसी (NOC) का उपयोग किया जा सकता है.
  • कार्यालय एक स्व-स्वामित्व वाली संपत्ति (Self-owned Property) में होने की स्तिथि में – इस स्तिथि में बिजली बिल, सेल डीड या किसी अन्य कार्यालय के स्वामित्व के कागजात का उपयोग किया जा सकता है.

Proprietorship फर्म के लाभ

Sole proprietorship भारत में शुरू होने वाली सबसे पुरानी और सरल व्यापारिक रूप जिसे कोई भी आसानी से संचालित कर सकता है. इसमें जो मालिक होता है अर्थात जो proprietor होता है वही सम्बंधित व्यवसाय का प्रबंधन और नियंत्रण करता है. जब व्यवसाय प्रबंधन एक ही व्यक्ति के हाथ में होता है तो इससे होनेवाले लाभ और हानि का भागीदार केवल वही होता है.

आइये जानते हैं कि proprietorship फर्म के क्या – क्या लाभ होते हैं –

  • कम पूँजी लागत और आसानी से शुरुआत किया जा सकता है. इसमें कोई औपचारिक निगमन या विघटन प्रक्रिया नहीं होती है. केवल कुछ पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त करके इसकी शुरुआत की जा सकती है.
  • व्यवसाय सम्बंधित कोई निर्णय लेने के लिए अन्य किसी पर आश्रित नहीं होना पड़ता है.
  • स्वामित्व केवल मालिक के पास होता है इसीलिए वह इसके संपत्ति, राजस्व, व्यय और सभी व्यावसायिक कार्यों पर खुद पूर्ण नियंत्रण रखता है.
  • अपने लाभ का आनंद एकमात्र मालिक लेता है.
  • Proprietorship व्यवसाय में कोई भागीदार, निदेशक, या शेयरधारक नहीं होते हैं इसीलिए व्यवसाय का मालिक न्यूनतम दस्तावेजों के साथ अपने व्यवसाय को आसानी से संचालित कर सकता है यही कारण है कि व्यवसाय का यह रूप बहुत छोटे व्यापारियों के लिए सबसे उपयुक्त और उत्तम है.

जहाँ लाभ है वहां हानि भी होते है और proprietorship फर्म के भी कुछ हानियां हैं जैसे –

Proprietorship फर्म के नुकसान

  • सभी प्रकार के देनदारियों के लिए मालिक व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाता है.
  • जिसप्रकार अपने लाभ का आनंद वह अकेले उठाता है उसीप्रकार हानि होने की स्तिथि में उसका वहन भी वह अकेले ही करता है.
  • व्यवसायिक ऋण या करों का भुगतान नहीं करने की स्तिथि में एकमात्र मालिक की व्यक्तिगत संपत्ति को संलग्न किया जा सकता है.
  • व्यवसाय निरंतरता बाधित होने की संभावना रहती है क्योंकि यदि एकमात्र मालिक की मृत्यु हो जाये, वह विकलांग हो जाये तो ऐसे मामलों में व्यवसाय स्वतः समाप्त हो सकता है.
  • यह आमतौर पर छोटे व्यवसाय के लिए ही उपयुक्त है. एकल स्वामित्व वाली संस्थाओं को ज्यादातर असंगठित व्यवसाय के रूप में वर्गीकृत किया जाता है.

अन्य महत्वपूर्ण बात

दोस्तों, अब तक आपने proprietorship फर्म सम्बंधित महत्वपूर्ण बातों को समझ चुके हैं और यदि आप इसतरह का कोई फर्म शुरू करना चाहते हैं तो व्यवसाय शुरू करने से पहले इससे सम्बंधित पूरी बातों को अच्छे से समझ लें और यदि कहीं परेशानी आती है तो आप किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं.

प्रकृति में छोटे पैमाने का व्यापार शुरू करने के लिए यह उत्तम होता है. देश में यह एक प्रकार की अपंजीकृत व्यावसायिक इकाई है जिसका स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण एक व्यक्ति द्वारा किया जाता है. आपको बता दें कि असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे सूक्ष्म और लघु व्यवसाय विशेष रूप से proprietorship फर्म में पंजीकृत होना पसंद करते हैं.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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