TDS क्या है? टीडीएस का फुल फॉर्म क्या होता है

TDS क्या है? यह हमारी ज़िन्दगी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, जिसके बारे में हम सभी को अवश्य पता होना चाहिए. देश के नागरिक होने के नाते हमें कई प्रकार का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर सरकार को देना पड़ता है इसी क्रम में हमारे द्वारा TDS के रूप में भी एक प्रकार का कर सरकार को चुकाया जाता है.

वैसे लोग जो नौकरी करते हैं उन्हें TDS के बारे में थोड़ा बहुत जरूर पता होता है, क्योंकि यदि उनकी सैलरी अच्छी है और आयकर के दायरे में आती है तो उनकी monthly salary में से एक निश्चित दर पर TDS काटकर ही उन्हें वेतन दिया जायेगा. यदि एक financial year में आपकी आय इनकम टैक्स छूट की सीमा के अंदर है तो आप अपने Employer से टीडीएस नहीं काटने का अनुरोध कर सकते हैं. इसके लिए आपको TDS फार्म 15G/15H भरने की आवश्यकता होगी.

ज्ञात हो कि टीडीएस केवल वेतन पर ही नहीं काटा जाता है, किन्तु बहुत से लोग ऐसा ही सोंचते हैं, जो सही नहीं है. यह कई प्रकार के आय स्त्रोतों पर तय दर पर काटा जाता है.

कई लोगों के मन में एक अहम् सवाल रहता है कि आखिर टीडीएस कटता है तो जाता कहाँ है? जैसा कि आप समझ चुके हैं कि टीडीएस भी एक प्रकार का कर है और इसके जरिये सरकार फण्ड जुटाती है ताकि देश की जनता को विभिन्न सुविधाएँ प्रदान की जा सके.

आईये विस्तारपूर्वक समझते हैं कि – TDS क्या है?

TDS क्या है?

TDS का पूर्ण रूप ‘tax deducted at source’ होता है और जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है यह आय स्रोत पर से ही काटा जानेवाला एक प्रकार का कर है. आपको पता होना चाहिए कि आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के अनुसार भुगतान करने वाले किसी भी कंपनी या व्यक्ति जो TDS के दायरे में आती है उसको स्रोत पर टीडीएस की रकम काटकर भुगतान (payment) करने की आवश्यकता होती है.

ध्यान रहे, टीडीएस उसी व्यक्ति या कंपनी के कमाई से काटा जाता है जिसकी कमाई एक निश्चित सीमा से अधिक है. इसका निर्धारण सम्बंधित वित्तीय वर्ष में लागू आयकर स्लैब दरों के आधार पर होती है. अगर आपका खाता किसी बैंक में है और आपने वहां अपना पैन की जानकारी उपलब्ध नहीं करवायी है तो वह बैंक भी TDS काट सकता है.

Payment करने से पहले टीडीएस काटना और सरकार के पास जमा करना यह जिम्मेदारी भुगतानकर्ता की होती है. भुगतानकर्ता को deductor कहा जाता है और जिसे टीडीएस काटके भुगतान प्राप्त होता है या payment पानेवाला व्यक्ति या कंपनी को deductee कहा जाता है.

TDS पर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  • TDS उस कर कटौती को कहा जाता है जो आय स्रोत पर काटा जाता है.
  • यह विभिन्न तरह के भुगतानों पर काटा जाता है किन्तु ध्यान रहे यह हर किसी transaction पर apply नहीं होता है.
  • यदि आपकी आय इनकम टैक्स के दायरे में है और आपका टीडीएस काट लिया गया है तो आप टीडीएस रिफंड क्लेम भी कर सकते हैं.
  • टीडीएस काटनेवाला टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करके जानकारी देता है कि कितना टैक्स काटा गया है.
  • TDS ऑनलाइन जमा करने के लिए आयकर विभाग के आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है.
  • टीडीएस अलग – अलग भुगतान पर आयकर विभाग की ओर से सुझाये गए अलग – अलग दरों पर काटा जाता है.

अन्य महत्वपूर्ण बात

ज्ञात हो कि टीडीएस कई प्रकार के आय स्रोतों पर काटा जाता है जैसे वेतन, बिल, कमीशन, किसी पेशेवरों को भुगतान किया जानेवाला फीस, किराया, ब्याज आदि पर. कभी – कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपके द्वारा ज्यादा टीडीएस का भुगतान कर दिया गया हो तो ऐसी स्तिथि में आप रिटर्न फाइल करके उसे आपस भी पा सकते हैं.

टीडीएस उतना ही भुगतान करना होता है जितनी आपकी कमाई है. यह सरकार के लिए कर संग्रह करने का एक आसान तरीका है और इसका एक फायदा यह भी है कि इसके जरिये कर चोरी को भी रोका जाता है. आज के ज़माने में कौन कितना आय अर्जित कर रहा है सरकार उसे आसानी से ट्रैक कर सकती है.

टीडीएस किस दर पर काटा जाएगा इसका निर्धारण भुगतान की प्रकृति पर होती है.

हमारे लिए सरकार कई प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध करवाती है और यह सब हमारे द्वारा भरे गये टैक्स से ही संभव हो पाता है.

TDS से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

  1. टीडीएस क्या है?

    आय स्रोत पर काटा जानेवाला कर, टीडीएस कहलाता है. यह कई प्रकार के आय स्रोत पर लगाया जाता है.

  2. टीडीएस क्यों काटा जाता है?

    लोगों की विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करने के लिए अथवा देश चलाने के लिए सरकार द्वारा कर संग्रह किया जाता है.

  3. टीडीएस का फुल फॉर्म क्या होता है?

    TDS का फुल फॉर्म ‘tax deducted at source’ होता है.

  4. टीडीएस कटौती से सम्बंधित नियमों का प्रबंधन कौन करता है?

    इसका प्रबंधन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes- CBDT) द्वारा किया जाता है.

  5. यदि कोई व्यक्ति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आता है तो वह क्या कर सकता है?

    वह व्यक्ति टैक्स काटनेवाले को  फॉर्म 15G या फॉर्म 15H दे सकता है ताकि उसका टीडीएस न कटे.

  6. Form 15G या Form 15H क्यों भरा जाता है?

    यह एक स्व घोषित फॉर्म है जिसे भरकर व्यक्ति घोषणा करता है कि उसकी कमाई टैक्सेबल लिमिट से कम है इसलिए उसका टैक्स न काटा जाए. इसे भरकर आप टीडीएस से बच सकते हैं यदि आपकी आय कर लगने के योग्य सीमा से कम है.

  7. Form 15G और Form 15H में क्या अंतर है?

    Form 15H वरिष्ठ नागरिकों के लिए अर्थात जिनका उम्र 60 वर्ष से ज्यादा है और Form 15G अन्य सभी व्यक्तियों के लिए होता है अर्थात जिनका उम्र 60 वर्ष से कम है.

  8. Form 15G और Form 15H की वैधता कब तक रहती है?

    इस फॉर्म को प्रत्येक वर्ष जमा करने की आवश्यकता है अर्थात वैधता केवल एक वर्ष के लिए होती है.

  9. टीडीएस भरने की दायित्व किसकी होती है?

    वह जो भुगतान कर रहा है टीडीएस काटकर सरकार के खाते में जमा करने के लिए उत्तरदायी है.

  10. टीडीएस काटने का दर कितना है?

    यह विभिन्न प्रकार के आय स्रोत या भुगतान की प्रकृति पर निर्भर करता है कि किस दर पर टीडीएस काटा जाएगा.

अंत में, मैं आशा करता हूँ कि आपको यह लेख “TDS क्या है?” जरूर पसंद आयी होगी और यदि आपको यह लेख पसंद आयी हो तो इसे like, share और comment करना न भूलें.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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