25+ Thought Of The Day In Hindi-आज का सुविचार-थॉट ऑफ़ द डे

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Thought Of The Day In Hindi- नमस्कार दोस्तों! हमारे वेबसाइट aryavarta talk में आपका स्वागत है. अब करें हर दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ जो आपको एक नए उर्जा से भर देगी. विचारों का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है, यह वो उर्जा है जो हमारे जीवन बदल देती है.

हमारे अपने संस्कारों के कारण बुरे विचार आते रहते हैं इसके लिए जरुरी है प्रत्येक दिन नियमित रूप से अच्छे विचारों के साथ एक नए जीवन की शुरुआत की जाए. पढ़िए हमारे साथ Thought Of The Day In Hindi : पढ़िए प्रेरक विचार हिंदी में.

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दिन भर में कभी न कभी कुछ देर के लिए ही सही महान विचारों का मनन करने का अभ्यास जरुर करना चाहिए यदि आप अपने जीवन में परिवर्तन चाहते हैं तो ? इसी कमी को पूरा करने के लिए हम प्रस्तुत कर रहे हैं आपके लिए शक्तिदायी विचार. तो फीर से स्वागत हैं है Quote of the day in hindi में.

Thought Of The Day In Hindi

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ज़िन्दगी के तीन मंत्र – (Thought Of The Day In Hindi)

  • आनंद में वचन मत दीजिये
  • क्रोध में उत्तर मत दीजिये
  • और दुःख में निर्णय मत लीजिये

आज का सुविचार (Thought Of The Day In Hindi)

  1. हर समस्या एक उपहार हैं, समस्याओं के बिना इंसान आगे नहीं बढ़ सकता – Tony Robbins
  2. जो लोग दूसरों का अपमान करते हैं वास्तव में वो अपना ही सम्मान खोते हैं .
  3. जिंदगी अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं – भगत सिंह
  4. यदि आप सकारात्मक विचार अपनाएंगे तो आपको सकारात्मक परिणाम मिलने शुरू हो जाएंगे.
  5. बुद्धिमान का दिमाग काम करता है, और मूर्ख की जीभ.
  6. हारता वह है जो संघर्ष नहीं करता.
  7. कल के लिए सबसे अच्छी तैयारी, आज अच्छा करो.
  8. अगर आप बड़ी सफलता चाहते हैं तो कड़े संघर्ष के लिए तैयार रहें.
  9. सफल होने के लिए आत्मविश्वास जरूरी है.
  10. अगर लोग आपके रास्ते में गड्ढा खोदें तो परेशान न हों क्योंकि वही आपको लम्बी छलांग लगाना सिखाएंगे.
  11. शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी है.
  12. हारने के डर से आगे बढ़ना मत छोड़ो, नहीं तो तुम्हारा जीवन ही बेकार है.
  13. दुनिया में आलोचकों की कमी नहीं है, इसलिए आलोचना से न डरें, नहीं तो आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे.
  14. समय के साथ खुद को ढालना सीखें, नहीं तो पीछे रह जाएंगे.
  15. जिसने स्वयं पर विजय प्राप्त कर ली है, समझ लो कि उसके लिए कुछ भी असम्भव नहीं है.
  16. किसी चीज के लिए जुनून आपको उस काम में निपुण बना देता है.
  17. काम को जितनी मेहनत, लगन और श्रद्धा से किया जाए, उतना ही अच्छा है.
  18. भीड़ में शामिल हो जाओगे तो खो जाओगे और अकेले खड़े होवोगे तो पहचाने जाओगे.
  19. समय कभी नहीं रुकता इसिलए अगर तुम रुक गए तो पीछे रह जाओगे.
  20. सच हमेशा कड़वा होता है.
  21. जो लोग बुरे समय में भी काम करते हैं, उनके लिए अच्छा समय जरूर आता है.
  22. अपनों की पहचान बुरे वक्त में ही होती है.
  23. बुरे वक्त में कोई निखरता है तो कोई बिखर जाता है.
  24. नफरत को प्यार से ही खत्म किया जा सकता है.
  25. एक बात हमेशा याद रखना ऐ मेरे दोस्त ! सुख के समय सभी हमारा साथ देते हैं किन्तु दुःख के समय सिर्फ ईश्वर हमारा साथ देता है.

कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता, कर्मफल मिलता ही है, इसलिए अच्छे कर्म करो.

मन की निर्मलता

मन के बारे में हम अक्सर बात करते रहते हैं किन्तु क्या आप जानते हैं कि हमारे जीवन का संचालक मन है. हमारा जीवन इसी के द्वारा संचालित है इसलिए अपने मन को कभी गन्दा नहीं होने देना चाहिए.

आप स्वयं ही विचार कीजिये कि हमारे जीवन का संचालक जो की हमारा मन है वही बुरा होगा तो जाहिर है हमारा जीवन भी बुरा होगा और यदि हमारा मन भला होगा तो हमारा जीवन भी कल्याणप्रद होगा.

जब मन का संसर्ग इन्द्रियों के सहारे वासना से होता है, तो वह गन्दा हो जाता है. मनुष्य पहले मन से कर्म करता है उसके बाद मन और देह दोनों से करता है इसलिए आपका मन जैसा होगा आपका कर्म भी वैसा ही होगा.

कहते हैं मन बहुत चंचल होता है और इसमें इतनी गति होती है कि यह पलक झपकते करोड़ों मिल की यात्रा क्षण भर में कर वापस आ सकता है. आप रात्रि में जो स्वप्न देखते हैं वास्तव में वह केवल मन की दौड़ है.

हमारे जीवन का कल्याण तभी संभव है जब हमारा मन निर्मल हो और हमारे नियंत्रण में हो. धार्मिक ग्रंथों जैसे वेदों, पुराणों आदि में मन को निर्मल बनाये रखने के अनेकों तरीके बताये गए हैं. जिसे अपनाकर हम अपने जीवन को कल्याणकारी बना सकते हैं.

सधन्यवाद! यदि आप भी कुछ प्रेरक विचार हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो आप कमेंट करके अपने अच्छे विचारों को हमारे साथ साझा कर सकते हैं.

आपको यी भी जानना चाहिए –

भारतीय संविधान की उद्देशिका

“हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को:

सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिए दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वरा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित, और आत्मार्पित करते हैं.”

जय हिन्द.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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