virasat ka sanrakshan

विरासत क्या है तथा इसका संरक्षण क्यों आवश्यक है?

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भारत एक ऐसा देश है जहाँ की विरासत अत्यंत विस्तृत और विविध है. अपनी अद्वितीय विरासत को बचाये रखना हमारा कर्तव्य भी है और हमारा अधिकार भी. वैश्वीकरण एवं औद्योगिकीकरण के कारण होने वाले तीव्र परिवर्तनों और लोगों में इसके महत्व के प्रति जागरूकता के अभाव के कारण इसे सुरक्षित रख पाना वाकई किसी चुनौती से कम नहीं है.

किसी भी देश के लिए उसकी विरासत अनमोल होती है इसीलिए अपनी इस अनमोल विरासत के महत्व को समझते हुए इसे सम्भाल कर रखना आवश्यक है. इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु विश्व विरासत दिवस प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है.

विरासत संरक्षण (virasat sanrakshan) क्यों आवश्यक है इसे जानने से पहले आपको ये जानना चाहिए कि – विरासत क्या है?

विरासत क्या है?

आसान शब्दों में यदि कहा जाए तो देश के अंदर हमारे चारों ओर मौजूद वैसी सभी वस्तुएं जो हमें हमारे पूर्वजों से प्राप्त हुआ है विरासत कहलाती है. विरासत, देश और लोगों की पहचान को परिलाक्षित करती है. किसी भी व्यक्ति के लिए विरासत उसकी पहचान होती है. वह अपने समृद्ध विरासत के बल पर गौरव प्राप्त करता है.

विरासत के कुछ उदाहरण निम्न है –

  • सांस्कृतिक विरासत जैसे रीति – रिवाज, धर्म, संस्कृति, भाषा, संगीत, नृत्य, भवन,अभिलेख, सिक्के, रहन – सहन, खान – पान आदि.
  • प्राकृतिक विरासत : पर्वत, भूमि, नदी, समुन्द्र, खनिज, मौसम, पशु – पक्षी आदि.

अब चलते हैं अपने मूल प्रश्न की ओर – विरासत का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

विरासत का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारी विरासत हमारी राष्ट्रिय पहचान है. इस कारण से इसका संरक्षण करना अति महत्वपूर्ण है. ऐसी कई एजेंसीयां हैं जो इसके संरक्षण का कार्य करते हैं किन्तु इस कार्य को करने के लिए हम सभी की सहभागिता भी जरुरी है.

कुछ लोग तो इसके महत्व को ही नहीं समझते हैं और मानते हैं कि इसके संरक्षण से कोई लाभ नहीं है. यदि हम यह आवश्यक समझते हैं कि अपने पूर्वजों से प्राप्त अपनी विरासत की निरंतरता बनाये रखें तो यह तभी संभव हो पाएगी जब हम अपनी विरासत संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे.

आप पर्यटन स्थलों से भलीभांति परिचित होंगे और क्या आपने कभी सोंचा है कि यह किसके दम पर चल रहा है. यह उद्योग देश की विरासत के दम पर ही फल – फूल रहा है जो दूर – दूर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इसके वजह से क्षेत्रियों लोगों को आर्थिक लाभ तो होता ही है साथ ही एक अलग पहचान भी बनती है.

1952 में भारतीय वन्य जीव बोर्ड की स्थापना हमारी प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए ही की गयी थी. सरकार के अलावा अन्य कई संस्थायें हैं जो पर्यावरण और वन्य जीवन संरक्षण का कार्य कर रही है. इसके महत्व को समझते हुए ही संविधान निर्माताओं ने इसे अनिवार्य बना दिया कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह अपनी सामासिक संस्कृति की समृद्ध विरासत का सम्मान और संरक्षण करे. वनों, नदियों, झीलों, वन्य जीवों सहित पर्यावरण को बचाये. (virasat sanrakshan)

विरासत के संरक्षण के उपाय और योगदान

  • स्मारकों और स्थलों के संरक्षण का कार्य केंद्र और राज्य सरकारें करती है
  • पुरातात्विक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कानून बनायें गए हैं
  • इमारत की मरम्मत करते वक्त यह ध्यान देना आवश्यक है कि इसका मूल रूप और स्तिथि बनी रहे.
  • हमारी विरासत के संरक्षण की आवश्यकता और महत्व के प्रति जागरूकता
  • भारतीय निधि व्यापार अधिनियम, 1876 के पारित होने से लोगों को कोई वस्तु अचानक मिलने पर सम्बंधित सम्बंधित अधिकारीयों को सूचित करना अनिवार्य है.
  • विरासत के संरक्षण में देश के संग्रहालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है.
  • हमारी बहुमूल्य और दुर्लभ पांडुलिपियों और वस्तुओं को सुरक्षित रखने में बौद्ध गोम्पाओं और कुछ जैन भंडारों का भी योगदान है.

भारत के कुछ प्रमुख विरासत स्थलों के नाम

virasat sanrakshan - Taj Mahal
  • सूर्य मंदिर, कोणार्क, ओडिसा
  • क़ुतुब मीनार, संकुल दिल्ली
  • ताज महल, आगरा उत्तर प्रदेश
  • बौद्ध स्मारक, साँची, मध्य प्रदेश
  • काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान, असम
  • सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिम बंगाल
  • बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर, तमिलनाडु
  • नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तरांचल
  • आगरा का किला, उत्तर प्रदेश
  • एलोरा की गुफाएं, महाराष्ट्र
  • अजंता और एलीफेंटा की गुफाएं, महाराष्ट्र आदि

अंतिम बात (virasat sanrakshan)

आखिर में, एक सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे पास है कि विरासत के संरक्षण में हमारी क्या योगदान हो सकती है? इसकेलिए हम और आप क्या कर सकते हैं? हम यह कहकर छुटकारा नहीं पा सकते हैं कि विरासत को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए तो हमारी सरकार ने कई कदम उठाये हैं और इसके लिए वह उत्तरदायी भी है?

क्या अपनी पूर्वजों की यादों को संजोकर रखना हमारा कर्त्तव्य नहीं है जिसके कारण से हमारी पहचान बनी है.

हमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है. हम अज्ञात स्मारकों, स्थलों को पहचानने, इन्हे सूचीबद्ध करने एवं इनके Documentation आदि कार्य कर सकते हैं. स्मारक किसी प्रकार क्षतिग्रस्त न हो इसपर नजर रख सकते हैं. ये अपने मूल जगह से हटाए ना जाएँ साथ ही इसकी चोरी ना हो सके इस पर भी चौकसी रख सकते हैं. हम अपने अनमोल विरासत के प्रति लोगों को जागरूक कर इसके महत्व बता सकते हैं. तालाब, नदियों, झरनों, समुन्द्रों आदि को यथाशक्ति प्रदूषित होने से बचा सकते हैं. वन्य जीवों पर करुणा का भाव रख सकते हैं.

इस विशेष लेख (virasat sanrakshan) के जरिये मैंने आपको विरासत और इसके संरक्षण से सम्बंधित बातें बताई. आप अपने विरासत के बारे में क्या सोंचते हैं हमें comment करके जरूर बताएं ताकि इस वेबसाइट के जरिये अन्य लोग भी अपने महान भारतीय विरासत के प्रति आपकी सोंच से अवगत हो सकें.

Lal Anant Nath Shahdeo

मैं इस हिंदी ब्लॉग का संस्थापक हूँ जहाँ मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता हूँ. मैं अपनी शिक्षा की बात करूँ तो मैंने Accounts Hons. (B.Com) किया हुआ है और मैं पेशे से एक Accountant भी रहा हूँ.

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